Sunday, 23 February 2014

दूध छोड़ने वाले वैष्णव जन

मिल गए अचानक 
सत्संगी 
कहने लगे 
मैंने छोड़ दिया भोजन में 
दूध का सेवन 
और दूध से बने भोजनो का स्वाद 
लहसुन प्याज तो पहले से 
छोड़ दिया था ,
वे वैष्णव थे 
वैष्णव होने का उन्हें गर्व था ,
मैंने उनसे कहा 
कब छोड़ेंगे 
इर्ष्या और द्वेष 
लोभ और हिंसा 
कब छोड़ेंगे 
दूसरे का घर देखकर 
कुढ़ना 
और कब छोड़ेंगे 
एक छोटा सा विश्वास 
जो कभी-कभी छोड़ते हैं 
अपने से गरीब आदमी को देखकर ,
वे कुछ तैश में आ गये 
मैंने उनका संग 
थोड़ी देर तक के लिए छोड़ दिया। 
हाय मैंने तो कोशिश की थी 
पर कहाँ मिल पाया 
मुझे सत्संग। 

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